इस सुबह, श्री सत्य सांई इंटरनेशनल सेंटर में, भगवान 9:15 पर बाहर आये, पाँच मिनट दर्शन देने के पश्चात् आरती स्वीकार किये। आरती स्वीकार करने के बाद, भगवान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गए। भगवान 10 बजे शिमला के लिए निकले और 11 बजे शिमला हवाई अड्डे पंहुचे। शिमला हवाई अड्डे से भगवान अपने दिव्य धाम, आनंद विलास जो 35 कि.मी. दूर स्थित है गाडियों से रवाना हुए।
दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार भगवान को लिए हुए वायु यान 4:30 बजे के आसपास इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे उतरा। भगवान और उनके साथ आये सभी सदस्य श्री सत्य साई इंटरनेशनल सेंटर के लिए सड़क मार्ग से रवाना हुआ जो हवाई अड्डे से लगभग एक घंटे की ड्राइव पर है।
सड़क मार्ग से एक घंटे लंबी सैर के बाद, 5:45 के आसपास उनकी कार उस गली में मुड़ी जहाँ इंटरनेशनल सेंटर स्थित है। उनके स्वागत में ड्रम बजाये गए। भगवान की कार का नेतृत्व सफेद और नीले रंग में तैयार बैंड ने किया, उसके पीछे नारंगी रंग में सजे वेद समूह के लड़कों जो जाप कर रहे थे प्रवेश द्वार तक आये। उनके भव्य नारंगी पोशाक में यह वेदा समूह भगवान् के कमल रूपी चरणों में गेंदे की फूल की तरह लग रहे थे। वहाँ बहुत सारे बालविकास के बच्चों ने उनका स्वागत किया।
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// भगवान् श्री सत्य साई बाबा रास्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक सप्ताह की यात्रा जो 9 अप्रेल से शुरू होगा जा रहे हैं। 9 अप्रेल की दोपहर को भगवान् अपने वरिष्ठ प्रशासक और छात्रों के साथ प्रशांति निलयम एअरपोर्ट से एक विशेष विमान द्वारा जायेंगे। श्री सत्य साई सेवा संगठन, दिल्ली द्वारा आधिकारिक वेबसाइट www.saidelhi.org पर जारी एक अधिसूचना के अनुसार DC-10 DDA मैदान (द्वारिका सेक्टर-10 मेट्रो स्टेशन के पास) द्वारका में 10,12,13 और 14 को भक्तो के लिए दर्शन की सुविधा रहेगी। दर्शन के लिए प्रवेश 3 बजे से शुरू हो जाएगा। भगवान की पिछली नई दिल्ली की यात्रा 1999 मार्च में थी, जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की उपस्थिति में लोधी रोड स्थित श्री सत्य साई इंटरनेशनल सेंटर का उद्घाटन किया था।
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जब पर्वत की चोटियों पर बारिश होती है, और पानी सब तरफ से निचे की ओर बहती है, उससे किसी नदी का निर्माण नहीं होता है। लेकिन जब पानी एक दिशा में बहती है, पहले एक नाले का निर्माण होता है, फिर धारा बनती है फिर एक तेज धार के साथ नदी का निर्माण होता है जो अंत में जाकर समुद्र में मिल जाती है। इसी प्रकार आपके मन और विचार हमेशा तेजी से पवित्र विचारों की ओर बने रहना चाहिए। आपके हाथ हमेशा अच्छे कर्मो में लगे रहना चाहिए। होठो पे भगवान् का नाम लिए हुए अपने कर्तव्यो का पालन करना चाहिए। वास्तव में जो योग्य होगा वही ऐसा करते हुए अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुचेगा! ~ बाबा
अगर ऐसा जिसे आप पसंद नहीं करते अगर आपके पास आये तो हमें उसमे गलती खोजने की आवश्यकता नहीं है। उन पर हंसने या उनकी अवमानना करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यही काफी है यदि आप उनके आने से प्रभावित हुए बिना अपना कार्य कर सके। उन्हें अपना मार्ग का पालन करने दे, उन्हें अकेला छोड़ दीजिये। यही व्यवहार “उदासीन भाव” कहलाता है, अर्थात अप्रभावित होना। अगर आप इसका अभ्यास करेंगे तब आपको भगवान के लिए अपरिवर्तित प्यार प्राप्त होगा। यह व्यवहार आपको चिरस्थायी शांति, आत्म नियंत्रण और मन की शुद्धता प्रदान करेगा। ~ बाबा

शिक्षा हमेशा पथ को प्रकाशवान करती है; अज्ञान का अंधकार और संदेह की सांझ इसके दीप्तमान होने के पहले ही गायब जाते हैं। इस प्रकार मन में अच्छे विचार और भावनाओं को विकसित करना आसान हो जाता है और ह्रदय प्रकाशवान हो जाता है। शिक्षा का अंत सिर्फ ज्ञान का संग्रह में नहीं है, इसके द्वारा मनुष्य के व्यवहार, चरित्र और महत्वाकांक्षा में परिवर्तन ही परिणाम है। ज्ञान को दैनिक जीवन में परीक्षण किया जाना चाहिए। मनुष्य को अपने भीतर मौजूद बहुमूल्य विरासत का आभास नहीं है। वह अपने स्वयं के अलावा हर किसी के में दिलचस्पी लेता है। अगर वह केवल अपने स्वयं के बारे में पता कर ले तो वह विशाल शक्ति, चिरस्थायी शांति और असंख्य सुख का धनी हो जायेगा। ~ बाबा

ह्रदय के दोष को नैतिक जीवन जीकर दूर किया जा सकता है और यह मनुष्य का कर्तव्य है। एक समय आता है जब आप थक या कमजोर पड जाते हैं, तब आपको प्रार्थना करनी चाहिए, “हे भगवान, चीजे मेरी क्षमता से परे चली गयी हैं, मैं आगे कठिन परिश्रम की आवश्यकता महसूस कर रहा हूँ। कृपया मुझे शक्ति दे।” शुरुआत में, भगवान दूर से आपके प्रयासों को देखते हैं जैसे एक शिक्षक अपने छात्र से दूर रहता है, जब वह अपने सवालों के जवाब लिखते हैं। फिर, जब आप अपने लगाव के बहाने आनंद और अच्छे कामों और सेवा में लग जाते हैं, परमेश्वर आपके पास आकर प्रोत्साहित करता है। उसके लिए भगवान सूर्य की तरह होता है जो बंद दरवाजे के बाहर इंतज़ार कर रहा है। भगवान उनकी मौजूदगी की घोषणा नहीं करता है या दरवाजा नहीं पिटता है, वह तो बस इंतजार करता है! जैसे ही तुम थोडा सा दरवाजा खोलते हो, सूरज की रोशनी तुरंत भीतर से अँधेरे को बाहर कर देती है। तो, जब भी भगवान की मदद मांगी जाती है, वह आपकी ओर सहायता के लिए हाथ बढ़ाये मौजूद होता है। यदि किसी चीज की जरूरत है तो वह है उसे याद करने के लिए ज्ञान और प्रार्थना और पूछने के बीच अंतर को जानने की।

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