Monday , Dec 28, 2009
वही सच्चा भक्त है जो भगवान की खुशी को अपनी ख़ुशी मानता है। वह हमेशा भगवान को खुशी देना चाहता है उनके लिए किसी भी असुविधा का कारण नहीं बनना चाहता है। आपको भक्ति के नाम पर भगवान के लिए कभी ही असुविधा पैदा नहीं करनी चाहिए। यह मानकर चलिए कि भगवान की खुशी में आपकी खुशी है और आपकी खुशी में भगवान की। एकता की इस भावना को आत्मसात कीजिये. आज ज्यादातर भक्त स्वार्थी हैं। उनमे केवल स्वार्थ भक्ति (स्वार्थी लाभ के लिए भक्ति करना) होती है। वे केवल अपनी खुशी के लिए चिंतित होते हैं ना कि परमेश्वर के। आपको यह देखना चाहिए कि आपका प्यार हमेशा शुद्ध होना चाहिए। भगवान प्रेम के प्रतीक है। ऐसा दिव्य प्रेम सभी में मौजूद है। सभी के साथ अपना प्रेम बाटें। यही प्रभु आपसे उम्मीद करते है। ~ बाबासाई स्मृति