Tuesday , Dec 29, 2009
कुछ प्रश्न जैसे ‘हम कहाँ से आये हैं?’, ‘हम कहाँ जायेंगे?’, ‘यह ब्रन्ह्मंड कैसे उत्पन्न हुआ?’ आदि – जब तक हम जीते हों हमें घेरे रहते हैं। सभी धर्मों ने इन सवालो का जवाब देने की कोशिश की है। मनुष्य को सभी क्षेत्रो में कुछ नियम बनाने की जरूरत है ताकि वह अपने दैनिक कार्यक्रम के संचालन में परिपक्वता लाकर जीवन जीने की प्रक्रिया का वास्तविक निर्देशन कर सके। क्योंकि ये भी आचार संहिता का हिस्सा हैं, इन्हें भी ‘अनुशासन’ के रूप में देखना चाहिए।
~Bhagwan Sri Sathya Sai Baba