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| Tuesday , Dec 29, 2009 |
कुछ प्रश्न जैसे ‘हम कहाँ से आये हैं?’, ‘हम कहाँ जायेंगे?’, ‘यह ब्रन्ह्मंड कैसे उत्पन्न हुआ?’ आदि – जब तक हम जीते हों हमें घेरे रहते हैं। सभी धर्मों ने इन सवालो का जवाब देने की कोशिश की है। मनुष्य को सभी क्षेत्रो में कुछ नियम बनाने की जरूरत है ताकि वह अपने दैनिक कार्यक्रम के संचालन में परिपक्वता लाकर जीवन जीने की प्रक्रिया का वास्तविक निर्देशन कर सके। क्योंकि ये भी आचार संहिता का हिस्सा हैं, इन्हें भी ‘अनुशासन’ के रूप में देखना चाहिए। ~Bhagwan Sri Sathya Sai Baba |
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3 comments
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फ़रवरी 18, 2010 at 11:43 पूर्वाह्न
jayram viplav
कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।
हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता “जनोक्ति परिवार “आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,
फ़रवरी 18, 2010 at 1:09 अपराह्न
jayantijain
does discipline work?
मार्च 4, 2010 at 6:40 अपराह्न
संगीता पुरी
हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!