जब पर्वत की चोटियों पर बारिश होती है, और पानी सब तरफ से निचे की ओर बहती है, उससे किसी नदी का निर्माण नहीं होता है। लेकिन जब पानी एक दिशा में बहती है, पहले एक नाले का निर्माण होता है, फिर धारा बनती है फिर एक तेज धार के साथ नदी का निर्माण होता है जो अंत में जाकर समुद्र में मिल जाती है। इसी प्रकार आपके मन और विचार हमेशा तेजी से पवित्र विचारों की ओर बने रहना चाहिए। आपके हाथ हमेशा अच्छे कर्मो में लगे रहना चाहिए। होठो पे भगवान् का नाम लिए हुए अपने कर्तव्यो का पालन करना चाहिए। वास्तव में जो योग्य होगा वही ऐसा करते हुए अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुचेगा! ~ बाबा
अगर ऐसा जिसे आप पसंद नहीं करते अगर आपके पास आये तो हमें उसमे गलती खोजने की आवश्यकता नहीं है। उन पर हंसने या उनकी अवमानना करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यही काफी है यदि आप उनके आने से प्रभावित हुए बिना अपना कार्य कर सके। उन्हें अपना मार्ग का पालन करने दे, उन्हें अकेला छोड़ दीजिये। यही व्यवहार “उदासीन भाव” कहलाता है, अर्थात अप्रभावित होना। अगर आप इसका अभ्यास करेंगे तब आपको भगवान के लिए अपरिवर्तित प्यार प्राप्त होगा। यह व्यवहार आपको चिरस्थायी शांति, आत्म नियंत्रण और मन की शुद्धता प्रदान करेगा। ~ बाबा

शिक्षा हमेशा पथ को प्रकाशवान करती है; अज्ञान का अंधकार और संदेह की सांझ इसके दीप्तमान होने के पहले ही गायब जाते हैं। इस प्रकार मन में अच्छे विचार और भावनाओं को विकसित करना आसान हो जाता है और ह्रदय प्रकाशवान हो जाता है। शिक्षा का अंत सिर्फ ज्ञान का संग्रह में नहीं है, इसके द्वारा मनुष्य के व्यवहार, चरित्र और महत्वाकांक्षा में परिवर्तन ही परिणाम है। ज्ञान को दैनिक जीवन में परीक्षण किया जाना चाहिए। मनुष्य को अपने भीतर मौजूद बहुमूल्य विरासत का आभास नहीं है। वह अपने स्वयं के अलावा हर किसी के में दिलचस्पी लेता है। अगर वह केवल अपने स्वयं के बारे में पता कर ले तो वह विशाल शक्ति, चिरस्थायी शांति और असंख्य सुख का धनी हो जायेगा। ~ बाबा




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